वास्तु का उपयोग मंदिर, मकान या किसी भी प्रकार के भवन निर्माण के समय किया जाता है। यह प्राचीन भारतीय विज्ञान आज के आधुनिक समय में भी सामयिक है। आज के दौर में भी हर कोई अपने घर या कार्यालय को वास्तु अनुरूप ही बनाना चाहता है। मान्यता है कि वास्तु नियमों के विपरीत होने पर मकान या दुकान को बाधाएं घेरे रहती हैं जबकि वास्तु नियमों का पालन कर बनाये गये भवनों में सदैव खुशहाली रहती है। उत्तर भारत की यदि बात करें तो यहां भगवान विश्वकर्मा को वास्तु कला का जनक माना जाता है तो दक्षिण में इस प्रकार की मान्यता है कि प्रसिद्ध साधु मायन यह कला लेकर आये। आइए इस सेक्शन में समझते हैं वास्तु से जुड़ी कुछ खास बातें और ज्ञानवर्धन व मार्गदर्शन करने वाली जानकारियाँ।

भूखंड का वास्तु

कार्यालय का वास्तु